आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बेसबब मोहब्बत

                
                                                         
                            अब आओगे तुम, तो कहाँ रूक पाओगे
                                                                 
                            
अकेले तो नहीं रहे, जो ठहर जाओगे ।
न भूला पा रही मैं, न भूलना दे रहे तुम
हाथ थामकर मांगा जब, साथ उम्रभर का
न सोची थी,दगा दे जाओगे।।
नादान थी मैं- कि तुमसे दिल लगाने की खता कर बैठी,
होश न रहा,औरों से भी मेरी तरह फरमाओगे।
देखा उस नूर को मैंने -जिसे तुमने पाया है।
तरस आता है, जब खयाल करती हूँ ,
उसे भी छोड़ तुम किसी और की जु़ल्फों में समा जाओगे ।।

है कैसी ये शख्सियत तुम्हारी -
जो सारे गिले मिटा देती है।
जैसे कभी कुछ हुआ न था
ऐसे मुझे हंसा देती है।
जैसे भी हो, बड़े बेमुरव्वत हो,
खुदा से तो डरते-
जब किसी के दिल में,
झूठी मोहब्बत लिए, पनाह लेते हो ।।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
11 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर