विज्ञापन

हिटलर की वापसी

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं हिटलर हूं
        
                                                    
                            
हां, हां वही हिटलर
तानाशाही मेरे खून में बसी है
धर्म सत्ता पुलिस लाठी
ये सब मेरे 'प्रोटेक्टर' हैं
आजकल मैं विश्वविद्यालयों में
व्यस्त हूं...।

अपने विचारों को थोपने में
आजादी को खत्म करने में
छात्रों को मारने में
शिक्षा खत्म करने में....।

लोकतंत्र से मुझे खतरा है
लाल रंग से है डर
संविधान से मुझे खतरा है
नीले रंग से है डर
सारी मीडिया मेरी है
सोशल मीडिया से है डर...।

जब-जब मैं डरता हूं
पुलिस को आगे करता हूं
लाठियां, गोलियां चलाता हूं
मारता हूं पीटता हूं
खून बहाता हूं
जेल भेजता हूं
हां मैं हिटलर हूं...।

-सिराज

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile