विज्ञापन

बीनणी बह न जाय।

Shiddharth Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हे माधव! छीन ले कलम मेरे हाथों से
        
                                                    
                            
कहीं शब्दों का क़त्ल हो न जाए।

अरे कलवे बदरा कहीं दूर जा के रो।
आंसुओं से तेरे, कैदे बीनणी बह न जाए।।
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Adv DK Kanojiya

71 कविताएं

View Profile

Suresh Kumar

579 कविताएं

View Profile