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साँवरे! तू आ जा रे : माधुर्य–करुण कृष्ण-भजन

श्री सनातन

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                            साँवरे! तू आ जा रे,
        
                                                    
                            
मेरे मन में बस जा रे।
राधे के संग, मुरली के रंग,
प्रेम-ज्योति जला जा रे॥

बरसाने की गली महकती,
वृंदावन मुसकाता है,
राधा संग जब श्याम खड़े हों,
चंदा भी शरमाता है।
मोर-मुकुट सिर, अधरों मुरली,
नैनन रस की धार रे—
साँवरे! तू आ जा रे,
मेरे मन में बस जा रे॥

यमुना-तट पर मंद पवन में,
मुरली मधुर बजाए,
कदंब-छाँव में राधा संग,
श्याम मधुर मुसकाए।
तेरे नाम की रट ऐसी लगी,
भूला जग-संसार रे—
साँवरे! तू आ जा रे,
मेरे मन में बस जा रे॥

सूनी अँखियाँ राह निहारें,
कब आओगे मोहन?
टूटे मन की पीर सुनाऊँ,
किसको पुकारूँ मोहन?
जग ने जब सब द्वार बंद किए,
तू ही मेरा द्वार रे—
साँवरे! तू आ जा रे,
मेरे मन में बस जा रे॥

आँसू बनकर नाम बहा है,
साँस-साँस में तू है,
सूने मन के हर कोने में
एक आस में तू है।
एक झलक बस दे दे मोहन,
मिट जाए अँधियार रे—
साँवरे! तू आ जा रे,
मेरे मन में बस जा रे॥

सहसा मुरली-स्वर गूँजा,
थर-थर काँपे प्राण,
बंद नयन जब खोल दिए तो
सामने खड़े भगवान!
मोर-मुकुट से प्रभा बरसती,
अधरों पर मुस्कान रे—
साँवरे! तू आ जा रे,
मेरे मन में बस जा रे॥

हाथ बढ़ाकर श्याम ने बोला—
“क्यों रोता है प्यारे?
मैं तो तेरी साँस-साँस में,
कब छोड़ा तेरा साथ रे?”
चरणों पर गिर पड़ा भक्त फिर,
बह निकली अश्रुधार रे—
साँवरे! तू आ जा रे,
मेरे मन में बस जा रे॥

मंदिर ढूँढ़े, तीर्थ निहारे,
जप-तप किए हजार,
जब अंतर का द्वार खुला तो
मिल गया नंदकुमार।
प्रेम जहाँ निष्कलुष हुआ है,
वहीं बसे गिरधार रे—
साँवरे! तू आ जा रे,
मेरे मन में बस जा रे॥

साँवरे! तू आ जा रे...
आ जा रे... आ जा रे...
राधे के संग, मुरली के रंग,
प्रेम-ज्योति जला जा रे॥

जिसने सच्चे मन से पुकारा,
उसका तू आधार रे—
साँवरे! तू आ जा रे,
मेरे मन में बस जा रे॥

बाहर ढूँढ़ा, भीतर पाया,
खुला प्रेम का द्वार रे—
साँवरे! तू आ जा रे,
मेरे मन में बस जा रे॥

राधे के संग, मुरली के रंग,
प्रेम-ज्योति जला जा रे॥

साँवरे! तू आ जा रे...
मेरे मन में बस जा रे...॥
-सनातन मुकुंद
4 घंटे पहले
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