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मैया! तेरा नंदलाला : वात्सल्य–भक्ति कृष्णगीत

श्री सनातन

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैया! तेरा नंदलाला,
        
                                                    
                            
सबसे न्यारा, सबसे प्यारा।
तेरी गोदी खेले कान्हा,
जग का स्वामी, तेरा दुलारा॥

माखन-मटकी फोड़त कान्हा,
हँसत भागे मोहन,
नन्हे चरणों की आहट से,
महके ब्रज-आँगन।
जिसको ढूँढ़ें वेद-पुराण,
वह तेरे घर का लाला—
मैया! तेरा नंदलाला,
सबसे न्यारा, सबसे प्यारा॥

घुटुरुन-घुटुरुन चले कन्हैया,
झनके पायल-पाँव,
देख-देख मुसकाए मैया,
भूल गई घर-गाँव।
नैनों में ब्रज, हृदय में कान्हा,
मन में प्रेम उजाला—
मैया! तेरा नंदलाला,
सबसे न्यारा, सबसे प्यारा॥

मुँह में माटी देख यशोदा,
बोली—“क्यों रे लाल?”
मुख खोला तो उसमें दिखे,
तीनों लोक विशाल।
नभ-तारे सब भीतर चमके,
फिर भी माँ का लाला—
मैया! तेरा नंदलाला,
सबसे न्यारा, सबसे प्यारा॥

रस्सी लेकर बाँधने निकली,
हारी मैया बार-बार,
दो अंगुल कम पड़ती रस्सी,
झुका स्वयं करतार।
ज्ञान न बाँधे, ध्यान न बाँधे,
बाँधे प्रेम निराला—
मैया! तेरा नंदलाला,
सबसे न्यारा, सबसे प्यारा॥

अधर धरे बाँसुरिया जब,
ठहरी यमुना-धार,
वन-पाती भी झूम उठी रे,
गूँजा मधुर पुकार।
जड़ में चेतन, चेतन में वह,
मोहन मन का उजियारा—
मैया! तेरा नंदलाला,
सबसे न्यारा, सबसे प्यारा॥

देव जिसे प्रभु नाम पुकारें,
ऋषि जिसे ध्याएँ,
भक्त जिसे पाने को तरसें,
योगी ध्यान लगाए।
वही चुराए माखन-रोटी,
माँ से माँगे दुलारा—
मैया! तेरा नंदलाला,
सबसे न्यारा, सबसे प्यारा॥

तेरे आँचल की छाया में,
बँध जाता भगवान,
ममता बन जाती है पूजा,
प्रेम बने वरदान।
जहाँ प्रेम निष्कलुष हो मैया,
वहीं बसे नंदलाला—
मैया! तेरा नंदलाला,
सबसे न्यारा, सबसे प्यारा॥
- सनातन मुकुंद
एक महीने पहले
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