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ललही छठी मइया : सोहर

श्री सनातन

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ललही छठी मइया अइलीं अँगनवा,
        
                                                    
                            
मइया अइलीं अँगनवा हो।
ललना के लम्बी उमरिया देइहो,
भरि दिहो सुखवा हो॥

अँगना लीपि-पोति चौका सजवलीं,
मइया धरलीं नेम हो।
कुश-काँस के आसन बिछवलीं,
मनवा भइल मगन हो॥

ललही छठी मइया अइलीं अँगनवा,
मइया अइलीं अँगनवा हो।
ललना के लम्बी उमरिया देइहो,
भरि दिहो सुखवा हो॥

न हल चलइब, न चूल्हा जरइब,
आजु हलषष्ठी नेम हो।
अँचरा ओढ़ि बरतिन मइया,
धरलीं मन में प्रेम हो॥

पलना में झूले मोर ललनवा,
हँसि-हँसि बोले हो।
नयनन नीर भरि आवै मइया के,
कलेजा डोले हो॥

ललही छठी मइया अइलीं अँगनवा,
मइया अइलीं अँगनवा हो।
ललना के लम्बी उमरिया देइहो,
भरि दिहो सुखवा हो॥

बलदाऊ भइया हल धइले,
धरती हरियर भइली।
कान्हा संग गोकुल मुसकाया,
बंसी मधुरी बजली॥

धान-जवारा लहर-लहर डोले,
हरियर भइल कछार हो।
छठी मइया के असीस परै त,
भरि जावै घर-दुआर हो॥

मइया हाथ जोड़ि अरज करेली,
“छठी सुनहु अरजिया हो।
जुग-जुग जीए मोर ललनवा,
रहै तोहार छइयाँ हो॥”

ललही छठी मइया अइलीं अँगनवा,
मइया अइलीं अँगनवा हो।
ललना के लम्बी उमरिया देइहो,
भरि दिहो सुखवा हो॥

नयनन के नूरवा, कलेजा के टुकड़ा,
मोर ललना मुसकाय।
छठी मइया अँचरा पसारि के,
सगरी बलइया टारि जाए॥

दूध-दही अउ माखन-मिसरी,
नेह भरी थरिया हो।
तोहरे चरनन अरज लगाईं,
राखिहु ललना निरोगवा हो॥

सासु, ननद, भउजी मिलि के,
मंगल सोहर गावैं।
छठी मइया के पावन असीसा,
ललना माथे पावैं॥

ललही छठी मइया अइलीं अँगनवा,
मइया अइलीं अँगनवा हो।
जुग-जुग जीए मोर ललनवा,
मंगल भरै घरवा हो॥

ललही छठी मइया की जय हो,
हलषष्ठी मइया की जय हो।
ललना के लम्बी उमरिया देइहो,
मइया असीस दिहो हो॥

ललही छठी मइया अइलीं अँगनवा,
मइया अइलीं अँगनवा हो।
ललना के लम्बी उमरिया देइहो,
भरि दिहो सुखवा हो॥
- सनातन मुकुंद
10 घंटे पहले
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