विज्ञापन

गुरु-वंदना : गुरु पूर्णिमा गीत

श्री सनातन

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गुरु चरणों में शीश नवाएँ, श्रद्धा-सुमन चढ़ाएँ।
        
                                                    
                            
ज्ञान-ज्योति से जीवन अपना, हर पल जगमगाएँ॥

गुरु ही तम के अंतःपथ में, सूर्योदय बन आते।
भटके मन को सत्य-धर्म की, राह सहज दिखलाते॥

गुरु-वाणी अमृत-सी निर्मल, मिटे हृदय का भार।
उनकी कृपा से खिल उठता, जीवन का विस्तार॥

गुरु चरणों में शीश नवाएँ, श्रद्धा-सुमन चढ़ाएँ।
ज्ञान-ज्योति से जीवन अपना, हर पल जगमगाएँ॥

वेद-विचारों की गंगा बन, पावन ज्ञान बहाते।
प्रेम, दया, सेवा, समता के, मधुर मंत्र सिखलाते॥

गुरु पूर्णिमा का पुण्य-पर्व यह, वंदन का त्योहार।
शत-शत नमन गुरुचरणों को, बारंबार नमस्कार॥

गुरु चरणों में शीश नवाएँ, श्रद्धा-सुमन चढ़ाएँ।
ज्ञान-ज्योति से जीवन अपना, हर पल जगमगाएँ॥

गुरु से जागे आत्मदीप जब, मिटे भ्रमों का फेरा।
ज्ञान-वृक्ष की शीतल छाया, दे जीवन को बसेरा॥

संयम, साहस, सत्य, तपस्या—जीवन का श्रृंगार।
गुरु के पावन चरणों में है, हर सुख का आधार॥

गुरु चरणों में शीश नवाएँ, श्रद्धा-सुमन चढ़ाएँ।
ज्ञान-ज्योति से जीवन अपना, हर पल जगमगाएँ॥

ऋषि-परंपरा अमर रहे यह, जग में गूँजे वाणी।
गुरु-आशीषों से महके हर जन-मन की फुलवारी॥

भारत-भूमि रहे आलोकित, बहे ज्ञान की पावन धार।
गुरु पूर्णिमा पर करें सभी मिल, शत-शत बार नमस्कार॥

गुरु चरणों में शीश नवाएँ, श्रद्धा-सुमन चढ़ाएँ।
ज्ञान-ज्योति से जीवन अपना, हर पल जगमगाएँ॥
- सनातन मुकुंद
7 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

User

26 कविताएं

View Profile

Sudhir Khatri

562 कविताएं

View Profile