आई रे सावन, पवन करे शोर,
जियरा रे झूमे, नाचे मन-मोर।
रिमझिम बरसे बदरिया घनघोर,
भींजे धरती, महके चहुँ ओर॥
कदंब-डाली पर कोयलिया गाए,
मोरवा पंख पसार नयन हरषाए।
हरियर चुनरिया ओढ़े धरा नवेली,
हँसे फूल-पात, बगिया अलबेली।
गूँजे बनवा में मधुर स्वर चहुँ ओर,
जियरा रे झूमे, नाचे मन-मोर॥
सन-सन पुरवैया संदेसा सुनावे,
सोंधी माटी मन-अँगना महकावे।
नदिया की लहरिया गीत सुनावे,
झरना भी रुनझुन राग सुनावे।
पायलिया बाजे छम-छम चहुँ ओर,
जियरा रे झूमे, नाचे मन-मोर॥
घिर-घिर आए बदरिया कारी,
दमके दामिनि, हँसे फुलवारी।
बूँदन की माला धरती पर छाए,
हर तृण में नवजीवन मुसकाए।
नेह जगाए पिया-मिलन की डोर,
जियरा रे झूमे, नाचे मन-मोर॥
ढोलक बाजे, मंजीरा झंकारे,
सखियाँ मिल सावन-गीत सँवारे।
तन ही नहीं, मनवा भी भींजे,
प्रेम-दीप अंतर-आँगन सींचे।
मंगल-रस बरसे, सुख चहुँ ओर,
जियरा रे झूमे, नाचे मन-मोर॥
आई रे सावन, पवन करे शोर,
जियरा रे झूमे, नाचे मन-मोर।
रिमझिम बरसे बदरिया घनघोर,
भींजे धरती, महके चहुँ ओर॥
- सनातन मुकुंद