वो मुझसे आजकल अक्सर शिकायत करती रहती है,,,
तुम्हारे बाद जाने के मोहब्बत महका करती है...
बचाती फिरती रहती हूं मैं अपने आप से दामन,,,
मगर कमबख्त आंखें आईना ही देखा करती हैं...
न जाने कौन सी चादर सुकूं की छोड़ जाते हो,,,
मेरी अंगड़ाईयां बिस्तर पे हरदम सोया करती हैं...
मेरे पहलू में आने की कोई फिर से वजह ढ़ूंढ़ो,,,
तेरे पहलू में आने को मेरी जां निकला करती है...
जहां बैॆठे थे तुम पिछली दफा कुछ याद है तुमको,,,
ये पलकें आज भी उस दर से झुक कर ही निकलती हैं...
शिकायत आजकल इक ही सभी से सुनती रहती हूं,,,
ये जाने कौन सी दुनिया में सांसे लेती रहती है...
तुम्हे अब तक समझ जाना था ' सानू 'बात इतनी सी,,,
वो जिससे प्यार करती है उसी से करती रहती है...
Shanu...