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मां की ममता

Shanti Swaroop

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माँ की गोदी थी मेरी शैय्या !
        
                                                    
                            
मुझसे बतियाती मेरी मईया !!
जब भूख लगी तो रो देता !
जब नींद लगी तो सो लेता !!
ना कोई थी खाने की चिंता !
ना कोई थी पाने की चिंता !!
ना थी रोज़ी रोटी की चिंता !
ना थी खरी खोटी की चिंता !!
सबने मुझे इतना प्यार किया !
बदले में मैने कुछ न दिया !!
मैं अपनों की बाहों में झूला !
नहीं समाता था कोई फूला !!
मैं मुस्काता तो सब मुस्काते !
मैं जब रोता तो सब दुलराते !!
कब ठंडी आई कब गर्मी आई !
कब बादल गर्ज़े कब बर्षा आई !!
मौसम का कोई असर न आया !
अपने को मां की रक्षा में पाया !!
बड़ा सुखद था वो जीवन आनंद !
अपनों की गोदी का वो परमानंद !!
नन्हा पोता गोदी में आके मुस्काया !
मेरा वचपन फिर से यादों में आया !!
मन करता है फिर से बच्चा बन जाऊँ !
एक बार फिर अपनों का प्यार मैं पाऊँ !!

-शांती स्वरूप मिश्र
एक वर्ष पहले
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