आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मां की ममता

                
                                                         
                            माँ की गोदी थी मेरी शैय्या !
                                                                 
                            
मुझसे बतियाती मेरी मईया !!
जब भूख लगी तो रो देता !
जब नींद लगी तो सो लेता !!
ना कोई थी खाने की चिंता !
ना कोई थी पाने की चिंता !!
ना थी रोज़ी रोटी की चिंता !
ना थी खरी खोटी की चिंता !!
सबने मुझे इतना प्यार किया !
बदले में मैने कुछ न दिया !!
मैं अपनों की बाहों में झूला !
नहीं समाता था कोई फूला !!
मैं मुस्काता तो सब मुस्काते !
मैं जब रोता तो सब दुलराते !!
कब ठंडी आई कब गर्मी आई !
कब बादल गर्ज़े कब बर्षा आई !!
मौसम का कोई असर न आया !
अपने को मां की रक्षा में पाया !!
बड़ा सुखद था वो जीवन आनंद !
अपनों की गोदी का वो परमानंद !!
नन्हा पोता गोदी में आके मुस्काया !
मेरा वचपन फिर से यादों में आया !!
मन करता है फिर से बच्चा बन जाऊँ !
एक बार फिर अपनों का प्यार मैं पाऊँ !!

-शांती स्वरूप मिश्र
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर