विज्ञापन

जंगल से गुजरते हुए

Shalini Mohan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जंगल से गुजरते हुए
        
                                                    
                            
ईश्वर की नहीं अपने पूर्वजों की याद आई
ईश्वर और जंगल में बस इतना फर्क है
एक विराट है और दूसरा विस्तार

जंगल के मौन ने समझाया
संचित शब्दों का अपना एक संसार है
जंगल की गंध ने कहा
भटकने के लिए अक्खड़पन जरूरी है
-शालिनी मोहन
9 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Nidhhi Mukesh

22 कविताएं

View Profile

Sarthak Piyush

28 कविताएं

View Profile