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हुनर में इश्क़ की थोड़ी मिलावट बाकी है।

shafaque rauf

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अभी तो चंद ही किश्तें चुकाई हैं मैंने,
        
                                                    
                            
सफ़र में ज़ब्त की कई मोहलत बाकी है।
जहाँ से होड़ की ख़्वाहिश नहीं रही कोई,
अभी तो ख़ुद से ही अपनी रक़ाबत बाकी है।
तराशना है अभी इस ख़ाम-ओ-ख़याल को,
हुनर में इश्क़ की थोड़ी मिलावट बाकी है।
-शफ़क़ रऊफ
3 घंटे पहले
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