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इस जन्म में निभा ना सका।

Savitri Swami

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कर दिया था पागल उसने,
        
                                                    
                            
मेरे दिल को घायल रे।
देती है धड़कन सुनाई,
जैसे पैरों की पायल रे।।

आकर मेरे जीवन में,
प्यार उसने सिखाया था।
होकर मेरा हो ना सका वो,
होना जुदा लिखाया था।।
बीच राह में छोड़ चला वो,
रही भटकती दर बदर।
उसको अपना बनाने खातिर,
ना छोड़ी मैने कोई कसर।।
क्या कहूं मैं अपनी जुबां से,
हो गई अदाओं की कायल रे।
कर दिया था पागल उसने,
मेरे दिल को घायल रे।।

टूटते हैं तारे जैसे,
टूट गए सपने सारे।
उसको मनाने जब चली,
रूठ गए सब अपने प्यारे।।
मैं चली थी प्यास बुझाने,
सूखे हुए समंदर से।
कैसे उग सकती फसलें,
उजड़ी भूमि बंजर से।।
रही मांगती मैं दुआएं,
बन भगवन की सायल रे।
कर दिया था पागल उसने,
मेरे दिल को घायल रे।।

जन्म जन्म के वादे झूठे,
इस जन्म में निभा ना सका।
है कोई उसकी भी अपनी,
वो खुद को समझा ना सका।।
आती थी ना कोई शायरी,
बन गई मैं अब शायर।।
पूछती हूँ आज उससे,
क्यों बना वो इतना कायर।।
छोड़ना था पहले छोड़ता,
क्यों छोड़ा बीच मझधार।
जीत गया वो अपनी खुशी,
हार गई मैं अपना प्यार।।
अपनी मस्त मौज में वो,
घूम रहा बन रॉयल रे।
कर दिया था पागल उसने,
मेरे दिल को घायल रे।।
 
23 घंटे पहले
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