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कविता (आजाद उड़ने दो)

Savitri Swami

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आजाद उड़ने दो,
        
                                                    
                            
मुझे आजाद उड़ने दो।
फैलाकर अपने पंख,
मुझे आजाद उड़ने दो।।
सोना चांदी ना चाहिए,
आजादी मेरा गहना है।
सजना सवरना छोड़ दो,
यही नारी से कहना है।।
करु ना किसी से मैं शिकायत,
हर समस्या से मुझे लड़ने दो।
आजाद उड़ने दो,
मुझे आजाद उड़ने दो।
फैलाकर अपने पंख,
मुझे आजाद उड़ने।।
ना पापा की परी बनना,
ना बनना मुझे बिटिया रानी।
मुझको तो बस लिखनी है,
आजादी की नई कहानी।।
कोई गीदड़ ना आँख उठाएगा,
बनके शेरनी दहाड़ने दो।
आजाद उड़ने दो,
मुझे आजाद उड़ने दो।
फैलाकर अपने पंख,
मुझे आजाद उड़ने दो।।
कोई और मुझे क्या रोकेगा,
रोक मुझे तुम देते हो ।
देकर प्यारे-प्यारे नाम,
आजादी छीन लेते हो।।
छोड़ो मुझे मेरे हाल पर,
अपना भविष्य गड़ने दो।
आजाद उड़ने दो,
मुझे आजाद उड़ने दो।
फैलाकर अपने पंख,
मुझे आजाद उड़ने दो।।
ना मुझे बंधन चाहिए,
ना करनी मुझको बंदगी।
तोड़के सारी जंजीरें,
जीनी है अपनी जिंदगी ।।
जो बहाव ना समझे धारा का,
नाली में उसको सड़ने दो।
आजाद उड़ने दो,
मुझे आजाद उड़ने दो।
फैलाकर अपने पंख,
मुझे आजाद उड़ने दो।।
(सावित्री स्वामी)
8 घंटे पहले
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