विज्ञापन

माता-पिता

Saurabh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            'पिता' शब्द है जीवन दर्शन,माँ जीवन का सार,
        
                                                    
                            
पिता शांत है सागर सा, माँ गंगा की धार।
पिता अंधेरों में दीपक सा, माँ भटकों को राह,
मात-पिता इन दो शब्दों में मिल जाता संसार।

पिता फूल है कांटो के संग,खुशबू इसकी माँ,
पिता रात में ध्रुव तारे सा, दिशा दिखाती माँ।
पिता ठंड में सूरज जैसा,गर्मी में शीतल छांव है माँ,
पिता सहन का दम्भ है, मर्यादा है माँ।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10845 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7356 कविताएं

View Profile