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आसमान का वीर — स्मिथ माच्छर

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आसमान की अनंत उंचाई,
        
                                                    
                            
हुआ साथी से वार अचानक,
खून से लथपथ, होश न खोया
चाहे मंज़र हुआ भयानक।

आस्तीन के सांप से लड़कर,
कॉकपिट का लॉक हटाया।
जब मिला सहारा बाहर से तो,
गीदड़ को पंजों से दबाया।

तन घायल था, दर्द बहुत,
हौसला गगन से ऊंचा था,
सैकड़ों यात्रियों की खातिर
कर्तव्य उससे ऊँचा था।

न भय दिखा, न कदम रुके,
न हिम्मत ने हार मानी,
स्मित माच्छर ने उस पल में
गढ़ी वीरता की कहानी।

विमान डगमग डोल रहा था
बैचेन हो रहा था तन-मन
एक पायलट के साहस ने
बचा लिए कितने जीवन!

हाथों में थी विमान की डोर,
पर मन में था अब दृढ़ विश्वास,
विपदा से लड़ते हुए उन्होंने,
रखा सुरक्षित सबका श्वास।

दुनिया ये सारी गर्व करे,
भारत की धन्य धन्य धरा।
स्मित माच्छर के साहस से
तिरंगे का मान बढ़ा।

वीर वही जो संकट में भी,
कर्तव्य से न हट जाए।
अपने दर्द को भूलकर भी,
दूसरों के प्राण बचाए!

आज मंच से एक सलाम,
उस साहस के नाम है।
स्मित! आपके हौसले को,
मेरा शत-शत प्रणाम हैं!

भारत के हर मानुष को,
स्मिथ पर अभिमान है।
दुनिया ने भी मान लिया है,
ये धरती क्यों महान है …
ये धरती क्यों महान है …

 
9 घंटे पहले
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Ramesh Raj

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