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तन्हा सफर

Satya Verma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उम्रभर नही आयी मेरी याद उन्हे
        
                                                    
                            
आज मेरी मौत का मातम मनाने आए हैं
उठाकर कफन मेरे मुख से देखा है गौर से
मेरी लाश पर एक अश्क गिराने आए हैं
कभी करके खुद से जुदा बेसहारा किया था मूझे,
वो मेरी अर्थी को आज सहारा देने आए हैं
जिन्दगी भर जलाया है मेरा दिल बार-बार,
आज आखिरी बार मेरा जिस्म जलाने आए हैं
गैरों की तरह लहजा था उनका जब तक मैं जिन्दा था,
आज मेरे बाद मेरी लाश पर अपनापन दिखाने आए हैं
3 वर्ष पहले
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