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तन्हा सफर

                
                                                         
                            उम्रभर नही आयी मेरी याद उन्हे
                                                                 
                            
आज मेरी मौत का मातम मनाने आए हैं
उठाकर कफन मेरे मुख से देखा है गौर से
मेरी लाश पर एक अश्क गिराने आए हैं
कभी करके खुद से जुदा बेसहारा किया था मूझे,
वो मेरी अर्थी को आज सहारा देने आए हैं
जिन्दगी भर जलाया है मेरा दिल बार-बार,
आज आखिरी बार मेरा जिस्म जलाने आए हैं
गैरों की तरह लहजा था उनका जब तक मैं जिन्दा था,
आज मेरे बाद मेरी लाश पर अपनापन दिखाने आए हैं
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3 वर्ष पहले

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