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मगर छांव सी इक रवानी रही है।

संतराम शर्मा 'हिन्दी'

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सफर ही सफर की कहानी रही है,
        
                                                    
                            
सफर में ज़िन्दगी जवानी रही है।

सफर में की सफर से गुफ्तगू
सफर की मुलाकातें रूहानी रही है।

सफर की धूप में जलते रहे हम,
मगर छांव सी इक रवानी रही है।

हर एक कदम पर मिले अजनबी,
हर एक मोड़ पे मेहरबानी रही है।

ज़माने की भीड़ में तन्हा भी थे हम,
ख़यालों की दुनिया सुहानी रही है।

न मंजिल की चाह, न घर का मोह,
राहें ही जीवन की निशानी रही है।
-संतराम शर्मा 'हिन्दी'
3 घंटे पहले
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