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ज़माना लाख रोके राह

संतराम शर्मा 'हिन्दी'

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करे जो इश्क शिद्दत से,
        
                                                    
                            
वही बदनाम हो जाए।
चर्चे जहां में हवा की
तरह सरे-आम हो जाए।

न पूछो हाल-ए-दिल
दीवानों का,
इस बस्ती के तपते हुए
सहरा में,
कोई पैगाम हो जाए।

लिखी जो हमने चाहत
की कहानी,
पन्नों से उड़कर ये
गुफ्तगू सरे-आम हो जाए।

ज़माना लाख रोके राह,
मगर रुकना गवारा नहीं
मिट जाए हस्ती तो क्या,
इश्क का नाम हो जाए।
- संतराम शर्मा'हिन्दी'
2 घंटे पहले
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