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कोई शीतल सलिल हो

संतराम शर्मा 'हिन्दी'

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हें मनाना एक
        
                                                    
                            
ख्वाब है,
तुम्हारा रूठना
एक किताब है।

पढूं मैं, वो
दिलकश किस्सा,
जिसमें तेरी
अदाएं बेहिसाब हैं।

पन्नों को पलटूँ तो
यादें महक उठें,
हर एक पन्ने पर
तेरा ही ख्वाब है।

तेरी खामोशी भी
कुछ-कुछ कहती है,
जैसे बिना बोले
दिया कोई जवाब है।

रूठना तेरा जैसे,
कोई शीतल सलिल हो,
मनाना मेरा जैसे
कोई प्यास है।

तू दूर सही पर,
मेरे दिल के पास है।
बस यही मेरी,
रूह का एहसास है।
-संतराम शर्मा'हिन्दी'
3 घंटे पहले
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