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प्रेम के बाद

Sarvesh Maurya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            और दिन गुज़र रहे उसके इस कदर
        
                                                    
                            
कभी गैलरी को टैप करता
कभी उसकी आँखों के
तो कभी माथे पर लगी बिन्दी के सहारे
रात के चार से
दिन के बारह बज जाते
कभी लगा लेता सीने से
उस आधी टूटी स्क्रीन को
और खुद से खुद को रुबरु कराता
कि किसी का पाना तब मालूम पड़ता है
जब उसके खोने का एहसास हो गया हो।
5 महीने पहले
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