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जनता का हथियार

Sarthak Piyush

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज के समय का यह कैसा है चुनाव,
        
                                                    
                            
हर तरफ दिख रहा है वादों का बहाव।
जनता के हाथों में ताकत है आई,
पर नेताओं ने फिर से विश्वास है जताई।

कुर्सी की खातिर हर कोई बोले,
झूठे दिलासों के सब पट खोले।
वोट माँगने आते हैं बनकर वो सीधे,
जीतते ही जनता से रिश्ते हैं तोड़े।

दफ्तरों में बैठी सरकार की घुसखोरी,
ईमानदारी की यहाँ हो रही है चोरी।
हक की खातिर भी देना पड़ता है दाम,
बिना रिश्वत के होता नहीं कोई काम।

बदलना होगा अब हमको यह मंजर,
जागना होगा हर एक नागरिक के अंदर।
सोच-समझकर ही अपना मत देना,
लालच में आकर कभी न बिकने देना।

वोट जनता की ताकत है,
लोकतंत्र की पहचान,
सही हाथों में सौंपो इसे-
यही है सच्चा सम्मान।

-: सार्थक पियुष सिंह
2 महीने पहले
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