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संघर्ष और समाज

Sarthak Piyush

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर सुबह एक नया सवेरा लाती है,
        
                                                    
                            
उम्मीदों की किरणें मन में जगाती है।
पर जीवन की राह कहाँ इतनी आसान है,
यहाँ कदम-कदम पर इम्तिहान है।

बचपन की वो बातें, वो माँ का दुलार,
अब वक्त के साथ बदल गया संसार।
कामयाबी ही यहाँ इंसान की पहचान है,
वरना समाज की नजरों में सब अनजान हैं।

मन में बस एक ही डर हर पल रहता है,
हर गली में महिलाओं का चुगली तंत्र चलता है।
थोड़ी सी भूल पर जो तमाशा बनाती है,
क्या इस समाज की औरतें यही रीति निभाती हैं?

सफल हुए तो दुनिया गले लगाती है,
वरना हर छोटी भूल पर उंगली उठाती है।
लोग क्या कहेंगे, यह डर सताता है,
पर सच्चा नायक वही जो आगे बढ़ता जाता है।

कहते हैं सार्थक पियुष, इस दुनिया की
बातों में मत खोना तुम,
खुद की नजरों में कभी कम मत होना तुम।
यह समाज तो हर मोड़ पर परखेगा तुम्हें,
पर अपनी मेहनत से ही आगे बढ़ना है तुम्हें।

खुद से लड़कर ही इतिहास बनता है,
सच्चा कर्मवीर कभी मुश्किलों से नहीं डरता है।
अपनी सोच को रौशन और बुलंद रखना,
कामयाबी के शिखर पर एक दिन तुम ही चमकना।

-: सार्थक पियुष सिंह
16 घंटे पहले
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