सब देख देख तुमसे सीखा
तेरी आँखों से ही जग देखा
माली की तरह उपवन सींचा
कल का सारा खाका खींचा
तेरी मेहनत से उपवन है ये
यदि खिला हुआ गुलशन है ये
उस पर आशीष तुम्हारा है
गिर कर उठना उठकर चलना
हर हाल में बस चलते रहना
जीने के जरूरी सबक दिए
बचपन भर साया बनके रहे
हर काम अगर मैं कर जाऊँ
हर बाधा पार जो कर पाऊँ
उसपर आशीष तुम्हारा है
पापा गुमसुम रह लेते हैं
बिन कहे मगर कह लेते है
जो बात उठे मेरे मन मे
कैसे वो उसे सुन लेते हैं
मैं कभी नही जो विफल हुई
मेरी जो भी परीक्षा सफल हुई
उस पर आशीष तुम्हारा है
सरोज यादव सरु
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