यह दृश्य अकेला काफी है
वो विकल वेदना कहने को
क्यों लघुता जाहिर करते हो
मानवता जीवित रहने दो
दुख दर्द सभी का साझा है
इस वक्त तो सब झगड़े छोड़ो
कश्मीर से केरल अपना है
शब्दों से नही अब घर तोड़ो
नफरत ने सारी दुनिया को
अजगर बन आज लपेट लिया
जिस देश ने इसको प्रश्रय दी
उनको ही मटियामेट किया
यह राम कृष्ण की धरती है
इसमे विषबेल नही पनपे
जो दुख में हैं सब अपने हैं
कोई आंच नही आये उनपे
समृद्ध रहे अपनी धरती
संस्कृति क्या है यह याद रखो
संवेदन जीवित रहने दो
दुखिया पर अपना हाथ रखो
सरोज यादव"सरु"
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