विज्ञापन

अमर उजाला काव्य जन्मोत्सव

Saroj Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अमर उजाला खबरों के प्रहरी
        
                                                    
                            
साहित्य पर डाली तुमने दृष्टि गहरी

सारे भारत से फिर निकल पड़ी
सरस काव्य की धारा गहरी

कितने अनजानो के नाम सुने
कितनो के तुमसे पहचान बने

हर ओर सजगता दिखती है
हर विषय पर समता दिखती है

नव लेखन को तो तुमने मान दिया
भूले बिसरों को फिर सम्मान दिया

मुड़ मुड़ देखा पद चिन्हों को
जाना साहित्य के सिंहो को

भारत से बाहर तक ले पहुंचे
विश्व कवि तक भी हम पहुंचे

अपनी गलियों में हम झांकें
जो थे गौरव उनको ताकें

मेरा शहर और भी खास बना
जब सृजको का भी नाम सुना

इरशाद कराया जब हमसे
एहसास कराया है तबसे

रचनाकारों की बाते अलबेली
थीं राज जो बातें हमसे बोलीं

हम उस दिन से कुर्बान हुए
जब कविता को भी जबान दिए

जब दिए विषय हैं अलबेले
लग गए विचारों के मेले

एक बरस से ही यह साथ मिला
पर लगता सदियों का सिलसिला

मेरी दुआ है प्रिय तुम फूलों फ़लो
सौ बरस में भी तुम नवल मिलो

एक वर्ष ये अमर प्रकाश रहा
यह जन्म दिवस बड़ा ख़ास रहा

अब बार बार यह दिन आये
पाठक मन भाव यही लाये

सरोज यादव "सरु"

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।






 
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all