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फिर से

sarita yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चल ना
        
                                                    
                            
फिर से बात करते है
जो था हम दोनो के दरमियान
फिर याद करते हैं
जो हो ना सका पूरा
मुक्कमल उसके होने की फ़रियाद करते हैं
चल ना
फिर उसी सफ़र मे चलते हैं
हमसफर बेशक ना बनना
खुशियो के मोती एक दुजे संग ढूँढते हैं
चल ना
फिर उन्ही गलियो मे घूमते हैं
प्यार बेशक ना करना
वही पुराने दोस्त बन इतराते हैं
चल ना
ज़िंदगी को एक खुशनुमा मोड़ देते हैं
एक दुजे के साथ उम्रभर ना सही
कुछ पल ही साथ सोच लेते हैं
रंगो से सजा दुनिया
फिर इसे खूबसूरत कोई मोड़ देते हैं
चल ना
फिर बात करते हैं
जो था हम दोनों के दरमियान
चल ना
फिर याद करते हैं

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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