देश में भड़की , समप्रदायिक्ता की आग
जिसमे जलकर ख़ाक हुए, कइयों के सुहाग
किसी ने खोया अपनों को, तो कई हुए अनाथ
मारो-मारो,काटो-काटो, जैसे गूंज रहे है शब्द
अख़बारों में छपि सुर्खियाँ, करती है स्तब्ध
जिसकी खातिर जिसके वास्ते,लड़ते है हम आप
वो धरती पर आकर , क्यूँ नही करता है इन्साफ
धन्यवाद!
संतोष यादव
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