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प्रकृति की गोद में पा लिया है अपना परम सुख हम।

sanserpal singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज हवा मुझको संग लेकर उड़ रही है,
        
                                                    
                            
जैसे आसमाँ में खुशबू घुल रही है।
देखा है प्रकृति को आज इतने करीब से,
लगता है जैसे ज़िंदगी फिर से खिल रही है।
न कोई चाह बाकी, न कोई आरज़ू है,
इस खुले आसमाँ में ही मेरी जुस्तजू है।
निकला हूँ दुनिया के जाल से पहली बार,
न कोई बंधन है, न कोई दीवार।
हर पत्ता कुछ कहता है, हर फूल मुस्कुराता है,
हवा का हर एक झोंका मुझको गले लगाता है।
आज खुद से मुलाकात हुई है कुछ इस तरह,
जैसे आत्मा को मिल गया हो अपना ही पता।
लगता है आज मेरा पुनर्जन्म हुआ है,
जैसे जीवन ने नया अर्थ छुआ है।
अब न मंज़िल की चाह है, न सफ़र का कोई ग़म,
प्रकृति की गोद में पा लिया है अपना परम सुख हम।
एक दिन पहले
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