आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

प्रकृति की गोद में पा लिया है अपना परम सुख हम।

                
                                                         
                            आज हवा मुझको संग लेकर उड़ रही है,
                                                                 
                            
जैसे आसमाँ में खुशबू घुल रही है।
देखा है प्रकृति को आज इतने करीब से,
लगता है जैसे ज़िंदगी फिर से खिल रही है।
न कोई चाह बाकी, न कोई आरज़ू है,
इस खुले आसमाँ में ही मेरी जुस्तजू है।
निकला हूँ दुनिया के जाल से पहली बार,
न कोई बंधन है, न कोई दीवार।
हर पत्ता कुछ कहता है, हर फूल मुस्कुराता है,
हवा का हर एक झोंका मुझको गले लगाता है।
आज खुद से मुलाकात हुई है कुछ इस तरह,
जैसे आत्मा को मिल गया हो अपना ही पता।
लगता है आज मेरा पुनर्जन्म हुआ है,
जैसे जीवन ने नया अर्थ छुआ है।
अब न मंज़िल की चाह है, न सफ़र का कोई ग़म,
प्रकृति की गोद में पा लिया है अपना परम सुख हम।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर