कौन महान है?
अपनी सोच या अपना काम।
कुछ लोग कहते हैं,
"अगर नहीं सोचोगे तो काम कैसे करोगे"?
कुछ लोग कहते हैं,
"काम बड़ा है-
काम करके जब तक साबित नहीं कर पा रहे हो,
तब तक सोच का कोई मूल्य नहीं है"।
मैं कहता हूँ,
"दोनों ही महान हैं।
काम करने के लिए सोचना चाहिए
और सोच को स्थापन करने के लिए
काम पूरा होना चाहिए"।