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कविता सुख

Sankhajit Bhattacharjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुख एक बीमारी है-
        
                                                    
                            
जितना तम्हें मिलेगा,
तुम फिर से उतना ही मांगते रहोगे:
मांगते मांगते तुम थक जाओगे,
तब भी तुम मांगते रहोगे।
लोग पूछेंगें,
'क्या जीवनभर दुखी बन के रहूँ'?
नहीं भाई।
जब तुम दुखी हो
तब सुखी बनने की कोशिश करो
और जब तुम सुखी हो
तब सोचो कि सुख चिरस्थायी नहीं। 
तब बीमारी तुम्हें कभी छू नहीं सकेगी।  
2 महीने पहले
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