विज्ञापन

इन्हें कैसे कहूं मैं तालिबान?

Sanjeev Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तालिबान ये कैसे हैं जिनमें,सिर्फ भरा है अंधविश्वास।
        
                                                    
                            
अपने ही देश के मुस्तकबिल का ,कर रहे सत्यानाश।

कर रहे सत्यानाश भाषा ये सिर्फ गोली की जाने।
प्यार,मुहब्बत,रहम,इन्सानियत ,को ना पहचाने।

पश्तो भाषा में विद्यार्थियों को, कहते हैं तालिबान।
खून की होली खेलते जो, इन्हें कैसे कहूं मैं तालिबान?

--संजीव शर्मा (हिंदी अध्यापक)
( पंचकूला) हरियाणा
 
हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anurag vishwkarma (aiyaar)

8 कविताएं

View Profile