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तू अपना निर्माता है

Sanjay Nirala

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तू अपना निर्माता है
        
                                                    
                            

तू अपना निर्माता है,
तू अपना विधाता है,
जैसा बीज बोएगा जग में,
वैसा फल ही पाता है।

तू अपना निर्माता है,
तू अपना विधाता है।

कहा कृष्ण से जामवंती ने
सांब को समझा दीजिए,
आपकी बात मानेगा वो,
राह उसे दिखला दीजिए।

कृष्ण हँसे फिर बोले
सांब! स्वयं को पहचान,
नाम तुम्हारा क्या कहता है,
पहले इसको रे जान।

तुझको अपने कर्मों से ही,
अपना पथ बनाना है,
जैसा बीज बोएगा जग में,
वैसा फल ही पाता है।

जोर-जबरदस्ती से कोई,
मन को बदल न पाता है,
ज्ञान दिया जा सकता है,
कर्म स्वयं ही भाता है।

मैं राह दिखा सकता हूँ,
चलना तुझको होगा,
अपने कर्मों का लेखा,
खुद ही तुझको ढोना होगा।

निज सुख-दुख का कारण भी,
तुझमें ही समाता है,
तू अपना निर्माता है,
तू अपना विधाता है।

नीम अगर बोएगा कोई,
आम कहाँ से आएगा?
काँटे बोकर राहों में फिर,
फूल कहाँ से पाएगा?

छल की खेती करके कोई,
सुख की फसल न काटे,
कर्मभूमि में सत्य के बीज,
बोए वही सुख बाँटे।

जैसी करनी वैसी भरनी,
नियम यही कहलाता है,
जैसा बीज बोएगा जग में,
वैसा फल ही पाता है।

कृष्ण कहें हे सांब सुनो,
स्वयं को मत भरमाना,
दोष किसी के माथे रखकर,
खुद से मत बच जाना।

कर्म तुम्हारे हाथ में हैं,
फल की चिंता छोड़ तू,
सच्ची राह पकड़कर मानव,
अंतर का तम तोड़।

जो अपने कर्म सँवार लेता,
जीवन उसका मुस्काता है,
तू अपना निर्माता है,
तू अपना विधाता है।

न कोई तेरा भाग्य लिखे,
न कोई मिटा सकता,
तेरे कर्मों से बढ़कर कोई,
तुझको गढ़ नहीं सकता।

कहे निराला, पहचान कर्म,
कर्म ही तेरा सहारा है,
जैसा बीज बोएगा जग में,
वैसा फल ही तुम्हारा है।

तू अपना निर्माता है,
तू अपना विधाता है,
कर्मों की इस पावन धरती पर,
मानव खुद को गढ़ता है।
-संजय निराला
 
17 घंटे पहले
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