उसने मुझको जहर दिया
करके मीठी-मीठी बात
वह तो किस्मत अच्छी थी
चला दिया जो कुत्ता लात।
फूटा गिलास, चाटा कुत्ता
निकल गई उसकी बारात
काँप गया दिल यह सोचकर
करते कितनी मीठी बात
लहू पिलाकर पाला जिसको
किया आज उसी ने घात ।।
– संजय कुमार गुप्त 'अबोध’