रंग-बिरंगी तितली रानी,
रोज कहाँ से आती हो,
हमें लुभाकर, जी बहलाकर,
चली कहाँ तुम जाती हो ?
फूल-फूल पर, कली-कली पर,
इधर-उधर इठलाती हो ।
समझ न पाता, धुन में ऐंठी
क्या दिनभर तुम गाती हो ?
रंग-बिरंगे पंख दिखाकर,
बच्चों को ललचाती हो ।
हाथ बढ़ाते ज्यों पकड़न को,
तुम फौरन उड़ जाती हो ।
विविध रंग के पंख संजीले,
कहाँ-कहाँ से लाती हो ।
जी चाहे कि पकड़ अभी लूँ,
इतना जी को भाती हो ।।
हमें बताओ तितली रानी,
कौन लोक से आई हो ?
जी करता कि झूम के गाएं,
इतनी खुशियां लाई हो।।
काश ! हमारे भी पर होते,
हम भी साथ तुम्हारे जाते ।
उसी लोक से हम भी रानी,
रंग-बिरंगी खुशियां लाते ।।