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स्वच्छता दवा है लाखों की

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रोज ब्रश दांतों पर करना,
        
                                                    
                            
सही तरीके से प्यारे,
जिह्वा को भी साफ करो,
मिटे कीटाणु सारे।

रोज नहाओ प्यारे बच्चों!
स्वच्छ और ताजे जल से,
लगाकर साबुन मैल छुड़ाओ,
पूरे बदन को मल–मल के ।

रगड़ के पोछो बदन को,
धुले हुए कपड़े पहनो,
बालों में फिर कंघा–तेल,
बालक अच्छे नेक बनो।

हाथ धुलो खाने से पहले,
ठीक तरह साबुन से,
बहुतेरे कीटाणु हैं रहते,
बढ़े हुए नाखूनों में।

जरूर कटवाओ नाखून को,
हफ्ते में एक बार,
नहीं तो होना पड़ सकता है,
बीमारी से दो-चार ।

स्वच्छता दवा है लाखों की,
सदा रहो तुम स्वच्छ,
कभी बीमार ना पड़ोगे,
रहोगे तुम यदि स्वच्छ ।।
एक घंटा पहले
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