आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

स्वच्छता दवा है लाखों की

                
                                                         
                            रोज ब्रश दांतों पर करना,
                                                                 
                            
सही तरीके से प्यारे,
जिह्वा को भी साफ करो,
मिटे कीटाणु सारे।

रोज नहाओ प्यारे बच्चों!
स्वच्छ और ताजे जल से,
लगाकर साबुन मैल छुड़ाओ,
पूरे बदन को मल–मल के ।

रगड़ के पोछो बदन को,
धुले हुए कपड़े पहनो,
बालों में फिर कंघा–तेल,
बालक अच्छे नेक बनो।

हाथ धुलो खाने से पहले,
ठीक तरह साबुन से,
बहुतेरे कीटाणु हैं रहते,
बढ़े हुए नाखूनों में।

जरूर कटवाओ नाखून को,
हफ्ते में एक बार,
नहीं तो होना पड़ सकता है,
बीमारी से दो-चार ।

स्वच्छता दवा है लाखों की,
सदा रहो तुम स्वच्छ,
कभी बीमार ना पड़ोगे,
रहोगे तुम यदि स्वच्छ ।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर