मम्मी-मम्मी मुझे बताओ,
नानी के घर चलोगी कब ?
रूठ जाऊंगी मैं जब मम्मी,
फिर तो हाथ मलोगी तब ।
नानी मुझको अच्छी लगती,
देर रात तक हैं वो जगती
कितनी अच्छी लोरी गाती,
थपकी देकर मुझे सुलाती ।।
नींद नहीं जब आती मुझको,
नये-नये वो किस्से कहती ।
रूठ जाती हूँ जब भी मैं,
पूरी रात वो भूखे रहती ।।
रोज कहानी मुझे सुनाती,
परियों की बातें बतलाती ।
छिपा के मुझको आंचल में,
स्नेह सहित मुझको सहलाती।।
मंद-मंद थपकी से मम्मी,
कितना सारा प्यार जताती।
सबसे अच्छी नानी मेरी,
कभी नहीं मुझसे घबराती।।
बहुत दिनों से मम्मी मैने,
नानी को न देखा है ।
चलो न मम्मी नानी के घर,
कल किसने कब देखा है ?
आती याद बहुत नानी की,
नानी मम्मी से बढ़कर ।
कब जायेंगी नानी के घर,
मम्मी हम बस पर चढ़कर?
मुझको नानी पास बिठाकर
धीरे-धीरे खूब खिलाती ।
कहाँ-कहाँ से ला कर के,
नानी मुझको दूध पिलाती।।
क्यों इतना वह प्यार करे,
मुझसे, मम्मी बोलो न!
बेटी हूँ मैं आपकी मम्मी,
या फिर उनकी? बोलो न !
मम्मी क्यों तूं रोती है ?
नानी हैं ना अपने साथ ।
नहीं है कोई अपना तो क्या?
फिर भी हम सब नहीं अनाथ।
आज मुझे तुम पाल रही माँ!
कल मैं तुम्हें संभालूंगी।
तुमको और नानी को मम्मी,
अपनी जहाँ बना लूंगी ।।
मान जाओ न मम्मी तुम !
चलो, चलें नानी के घर।
देवी जैसी नानी पाकर,
मम्मी हम जाएंगे तर ।।