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क्या होता जब–

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या होता जब हाथी दादा की,
        
                                                    
                            
टाँगें होती हिरने जैसी।
बिल्ली मौसी की मूंछें होती,
गौ माता की पूंछों जैसी ।।

चींटी की गर्दन जब होती,
लम्बी ऊँटों जितनी।
तितली के पर होते भारी,
हाथी के कानों जितनी ।।

बकरी में भी विष होता,जब
नागराज के जितना ।
मच्छर के भी अण्डे होते,
भारी मुर्गी जितना ।।

तोते की बोली जब होती,
कौए राजा जैसी ।
मोर सरीखे पर होता, तो–
लगती कोयल कैसी ?

मम्मी का मुख होता, सोचो–
अगर सिंहनी जैसा ।
रंग बदलते तब सोचो–
पापा कैसा-कैसा ।।

हम बच्चों के पास अगर,
होता पूरा पैसा ।
क्या से क्या कर जाते हम-
कुछ भी ऐसा-वैसा ।।
एक घंटा पहले
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