खेल हमें तंदुरुस्त बनाते,
आओ खेलें मिल-जुल कर,
हंसने से मन निर्मल होता,
आओ हंसते हैं खुलकर ।
चोर-सिपाही खेलेंगे हम,
दौड़ो तुम पकड़ेंगे हम,
सारे बच्चे खूब हसेंगे,
ना होगा कोई गम ।
खो-खो और कबड्डी खेलें,
है हममें इतना दम,
हम सदा मुस्कुराते रहते,
कभी न करते आँखे नम ।
चलो बनायें अपनी टीम,
शुरू करें क्रिकेट,।
देखें कौन हँसकर लेता है,
सबसे अधिक विकेट
हम अबोध फुटबॉल खेलते,
रहते चुस्त दुरुस्त,
घर में बैठे-बैठे वरना,
हो जाते हम सुस्त ।
भ्रातृ-भावना हमें सिखाते,
विविध भांति के खेल,
और सिखाते हंसते-हंसते,
करना सबसे मेल ।।