बेबस और बेजार जिंदगी,
कब तक इन्हें रुलाएगी ?
बेहद पीड़ा देगी कब तक,
भूखे पेट सुलायेगी ।
अल्ला रखे सलामत इनको,
इनसे क्या अपराध हुआ ?
कहाँ गई खुशियां बचपन की,
करना इनके लिए दुआ।
––संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’