विज्ञापन

आज सुबह एक चिड़िया उड़कर

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज सुबह एक चिड़िया उड़कर
        
                                                    
                            
मेरे छत पर आई
जी भर उसने इधर-उधर
लम्बी दौड़ लगाई ।
फुदक-फुदक कर, उचक-उचक कर
ठुमका खूब लगाई
जो भी आया जी में उसके मीठे सुर में गाई।
फिर छतपर बिखरे दानों को
चुन-चुन उसने खाई
आज सुबह एक चिड़िया उड़कर
मेरे छत पर आई।।
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Suresh Kumar

579 कविताएं

View Profile