आज सुबह एक चिड़िया उड़कर
मेरे छत पर आई
जी भर उसने इधर-उधर
लम्बी दौड़ लगाई ।
फुदक-फुदक कर, उचक-उचक कर
ठुमका खूब लगाई
जो भी आया जी में उसके मीठे सुर में गाई।
फिर छतपर बिखरे दानों को
चुन-चुन उसने खाई
आज सुबह एक चिड़िया उड़कर
मेरे छत पर आई।।