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चींटी को देखो

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सूक्ष्म जीव चींटी को देखो,
        
                                                    
                            
करती मेहनत कितनी ।
चढ़ जाती पर्वत पर देखो,
हिम्मत उसकी इतनी ।।

कभी न डरती, कभी न थकती
मौसम हो चाहे जैसा ।
कर ही लेती किसी तरह से,
काम कठिन हो कैसा ।।

कई गुना वह बोझ उठाती,
अपने तन के वजन से ।
भोजन से घर भरे है रहती,
मेहनत और लगन से ।।

गिरती-चढ़ती, गिरती-चढ़ती,
मंजिल तक चढ़ जाती है ।
कठिन परिश्रम का मीठा
फल, बच्चों ! वह पा जाती है ।।

दिनभर कितनी दौड़ लगाती,
मेहनत से वह जी न चुराती ।
घबराओ ना कभी काम से,
चींटी हमसे यही बताती ।।

प्यारे बच्चों ! करो परिश्रम,
श्रम से मिले सफलता ।
जीवन में तुम सफल रहोगे,
नहीं मिलेगी कभी विफलता ।।
एक घंटा पहले
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