सूक्ष्म जीव चींटी को देखो,
करती मेहनत कितनी ।
चढ़ जाती पर्वत पर देखो,
हिम्मत उसकी इतनी ।।
कभी न डरती, कभी न थकती
मौसम हो चाहे जैसा ।
कर ही लेती किसी तरह से,
काम कठिन हो कैसा ।।
कई गुना वह बोझ उठाती,
अपने तन के वजन से ।
भोजन से घर भरे है रहती,
मेहनत और लगन से ।।
गिरती-चढ़ती, गिरती-चढ़ती,
मंजिल तक चढ़ जाती है ।
कठिन परिश्रम का मीठा
फल, बच्चों ! वह पा जाती है ।।
दिनभर कितनी दौड़ लगाती,
मेहनत से वह जी न चुराती ।
घबराओ ना कभी काम से,
चींटी हमसे यही बताती ।।
प्यारे बच्चों ! करो परिश्रम,
श्रम से मिले सफलता ।
जीवन में तुम सफल रहोगे,
नहीं मिलेगी कभी विफलता ।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X