विज्ञापन

बिल्ली मौसी

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रोज रात को आती बिल्ली,
        
                                                    
                            
पकड़ चूहे को खाती बिल्ली।
सारा दूध पी जाती बिल्ली,
हमको बहुत सताती बिल्ली ।।

म्याऊँ-म्याऊँ करती बिल्ली,
नहीं किसी से डरती बिल्ली ।
आती चुपके डग भरती बिल्ली,
घर में गड़बड़ करती बिल्ली ।।

रोटी चावल जो भी पाती,
सब चुपके खा जाती बिल्ली।
जब चाहे घर में आ जाती,
तनिक नहीं शर्माती बिल्ली।।

दुबक कोने में बैठी रहती,
प्रतिदिन घात लगाती बिल्ली।
नजर बचाकर चुपके से,
जो मिलता खा जाती बिल्ली ।।

खटर-पटर से रातों को,
सोना दूभर कर देती बिल्ली।
कह अबोध चालाक बहुत ही,
कार्य अपना कर लेती बिल्ली ।।

लोग वहीं पर रुक जाते हैं,
राह काट जहाँ देती बिल्ली।
कहते बच्चे जिसको मौसी,
आखिर किसकी बेटी बिल्ली ।।
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Adv DK Kanojiya

71 कविताएं

View Profile