बहुत किये तुम आगजनी
बहुत लगाए नारे
लो बेटा ! दो लात चखो,
दिन में दिखेंगे तारे ।
शांतिपूर्ण विरोध का तो,
करते हैं हम स्वागत ।
पर, लेने का कानून हाथ में
हम देते नहीं इजाजत।।
-संजय कुमार गुप्त