किये बिना भी कभी
हो जाता है प्यार
पर मत जाने दो उसे
सीमा के पार
लालच से उसके आए
जीवन में हानि
अंत में मिलती है घुटन
बेचैनी आत्मग्लानि
-कुँवर संदीप सिंह